Farming

Farming in March in Hindi मार्च के महीने में उन्नत खेती

फसलों की देखभाल और नई बुवाई की पूरी जानकारी

यह ब्लॉग पोस्ट “मार्च के महीने में खेती” (Farming in March in Hindi) पर आधारित है, जो भारतीय किसानों के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगी।

भारत में मार्च का महीना ऋतु परिवर्तन का समय होता है। इस समय वसंत का आगमन हो चुका होता है और धीरे-धीरे गर्मी (लू) का अहसास होने लगता है। किसानों के लिए यह महीना ‘दोहरी जिम्मेदारी’ वाला होता है। एक तरफ रबी की फसलें (जैसे गेहूं, सरसों, चना) पककर कटाई के लिए तैयार हो रही होती हैं, तो दूसरी तरफ जायद फसलों (Garmi ki fasal) की बुवाई का यह सबसे उपयुक्त समय होता है।

इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि मार्च में कौन सी फसलें लगाएं, रबी की फसलों का प्रबंधन कैसे करें और इस मौसम में कीटों से बचाव के उपाय क्या हैं।Farming in March in Hindi

मार्च में बोई जाने वाली प्रमुख जायद फसलें Farming in March in Hindi

मार्च के तापमान में सब्जियों और लताओं वाली फसलों का विकास बहुत तेजी से होता है। यदि आपके पास सिंचाई की उत्तम व्यवस्था है, तो आप निम्नलिखित फसलों से बंपर मुनाफा कमा सकते हैं:

कद्दू वर्गीय फसलें (Cucurbits)

मार्च का महीना बेल वाली फसलों के लिए स्वर्ग समान है।Farming in March in Hindi

  • तरबूज और खरबूजा: गर्मियों में इनकी मांग सबसे अधिक होती है। मार्च के पहले पखवाड़े तक इनकी बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए।
  • खीरा और ककरी: कम समय में (40-50 दिन) पैदावार देने वाली ये फसलें नकद आय का बेहतरीन जरिया हैं।
  • लौकी, तौरी और करेला: इन्हें मचान विधि से उगाकर आप बेहतर गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं।

सब्जियां

  • भिंडी: अगेती भिंडी की बुवाई मार्च में की जा सकती है। ‘प्रभनी क्रांति’ या ‘अर्का अनामिका’ जैसी उन्नत किस्मों का चयन करें।
  • बैंगन और मिर्च: यदि आपने इनकी नर्सरी तैयार कर ली है, तो मार्च में इनका रोपण (Transplanting) अवश्य कर दें।
  • लोबिया (Chawli): यह हरी फली और दाल दोनों के काम आती है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है।

दलहन और चाराFarming in March in Hindi

  • मूंग और उड़द: रबी की कटाई के बाद खाली खेतों में मूंग (वैशाखी मूंग) की बुवाई करना मिट्टी के स्वास्थ्य और जेब दोनों के लिए अच्छा है।
  • हरा चारा: पशुओं के लिए ‘मक्का’ और ‘ज्वार’ की बुवाई इस समय की जा सकती है ताकि मई-जून की भीषण गर्मी में चारे की कमी न हो।

चारा फसलें (Fodder Crops)

मई-जून की तपती गर्मी में दुधारू पशुओं के लिए हरे चारे का संकट खड़ा हो जाता है, इसलिए मार्च में इसकी बुवाई जरूरी है:

  • मक्का और ज्वार: इन्हें चारे के उद्देश्य से सघन बुवाई (Dense sowing) के साथ लगाया जा सकता है।
  • लोबिया (Chawli): यह न केवल पशुओं के लिए पौष्टिक चारा है, बल्कि इसे सब्जी के रूप में भी बेचा जा सकता है।

मार्च में बुवाई के लिए 3 ‘प्रो’ टिप्स:

  1. बीज उपचार (Seed Treatment): गर्मी में मिट्टी जनित रोगों से बचने के लिए बीजों को कार्बेंडाजिम या ट्राइकोडर्मा से उपचारित करके ही बोएं।
  2. सिंचाई का समय: मार्च में वाष्पीकरण तेज होता है। सिंचाई हमेशा शाम के समय या अलसुबह करें ताकि पानी जड़ों तक टिक सके।
  3. मल्चिंग का प्रयोग: यदि संभव हो, तो क्यारियों को पुराने पत्तों या प्लास्टिक मल्च से ढकें। इससे 40% तक पानी की बचत होती है और खरपतवार कम उगते हैं।

बेल वाली फसलें (Cucurbits)Farming in March in Hindi

गर्मियों में पानी की अधिक मात्रा वाली फसलों की मांग सबसे ज्यादा होती है। इन्हें रेतीली और दोमट मिट्टी में आसानी से उगाया जा सकता है।

  • तरबूज (Watermelon): मार्च के पहले पखवाड़े तक इसकी बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए। ‘शुगर बेबी’ और ‘अर्का ज्योति’ जैसी किस्में अच्छा मुनाफा देती हैं।
  • खरबूजा (Muskmelon): कम पानी में अधिक मीठा फल देने वाली यह फसल 70-80 दिनों में तैयार हो जाती है।
  • खीरा और ककड़ी: ये फसलें बहुत कम समय (45-50 दिन) में फल देना शुरू कर देती हैं, जिससे किसानों को रोज की नकद आय होती है।
  • लौकी, तौरी और करेला: इन्हें यदि आप ‘मंचान विधि’ (Trellis system) से उगाते हैं, तो फलों की गुणवत्ता और चमक बाजार में ज्यादा दाम दिलाती है।Farming in March in Hindi

रबी फसलों का प्रबंधन और कटाई

मार्च के अंत तक गेहूं, सरसों और चने की फसलें पकने लगती हैं। यहाँ कुछ सावधानियां जरूरी हैं:

  1. सिंचाई का प्रबंधन: गेहूं में जब दाना दूधिया अवस्था में हो, तो अंतिम सिंचाई बहुत सावधानी से करें। तेज हवा चलने पर सिंचाई न करें, वरना फसल गिर सकती है (Lodging)।
  2. सरसों की कटाई: जब सरसों की फलियां पीली पड़ने लगें (लगभग 75-80% दाने पक जाएं), तब कटाई शुरू कर दें। ज्यादा सूखने पर दाने झड़ने का डर रहता है।
  3. भंडारण: फसलों को काटकर खलिहान में अच्छी तरह सुखाएं। अनाज में नमी 10-12% से अधिक नहीं होनी चाहिए, अन्यथा भंडारण में घुन लग सकता है।

मार्च में कीट और रोग प्रबंधन

तापमान बढ़ने के साथ ही फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है।Farming in March in Hindi

कीट/रोगप्रभावित फसलसमाधान
चेपा (Aphids)सरसों, सब्जियांनीम के तेल का छिड़काव या इमिडाक्लोप्रिड का प्रयोग करें।
पाउडरी मिल्ड्यूमटर, कद्दू वर्गीयगंधक (Sulphur) आधारित फफूंदनाशक का उपयोग करें।
फल छेदकटमाटर, बैंगनफेरोमोन ट्रैप लगाएं और प्रभावित फलों को नष्ट कर दें।

मिट्टी की उर्वरता और खाद प्रबंधन

मार्च में बुवाई से पहले मिट्टी की जांच (Soil Test) कराना सबसे समझदारी का काम है।

मिट्टी की उर्वरता (Soil Fertility) और खाद प्रबंधन (Manure Management) किसी भी सफल खेती की रीढ़ होती है। मार्च के महीने में, जब आप रबी की फसल काट रहे होते हैं और जायद (गर्मी) की फसलें लगा रहे होते हैं, तो मिट्टी को पुनर्जीवित करना अनिवार्य है।

यहाँ मिट्टी की ताकत बढ़ाने और खाद के सही इस्तेमाल के लिए एक विस्तृत मार्गदर्शिका दी गई है:Farming in March in Hindi


मिट्टी का स्वास्थ्य परीक्षण (Soil Testing)

किसी भी प्रकार की खाद डालने से पहले यह जानना जरूरी है कि मिट्टी में किस तत्व की कमी है।

  • परीक्षण का समय: फसल कटने के तुरंत बाद और नई बुवाई से पहले।
  • फायदा: इससे आपको पता चलता है कि खेत में नाइट्रोजन ($N$), फास्फोरस ($P$), या पोटेशियम ($K$) में से किसकी कमी है। इससे अनावश्यक खाद का खर्चा बचता है।Farming in March in Hindi

जैविक खाद का महत्व (Organic Manure)

रासायनिक उर्वरकों के लगातार प्रयोग से मिट्टी ‘कठोर’ हो जाती है। मार्च की गर्मी में मिट्टी की नमी सोखने की क्षमता बढ़ाने के लिए जैविक खाद सर्वोत्तम है।

  • गोबर की खाद (FYM): ध्यान रहे कि गोबर पूरी तरह सड़ा हुआ हो। कच्चा गोबर डालने से खेत में दीमक (Termites) का प्रकोप बढ़ जाता है।
  • वर्मीकम्पोस्ट (Kenchua Khad): इसमें सूक्ष्म पोषक तत्व अधिक होते हैं। यह मिट्टी की संरचना (Texture) में सुधार करता है।
  • हरी खाद (Green Manure): मार्च में रबी की कटाई के बाद ढैंचा या सनई की बुवाई करें और 45-50 दिन बाद उसे खेत में ही जोत दें। यह नाइट्रोजन का सबसे सस्ता और बेहतरीन स्रोत है।

रासायनिक उर्वरकों का संतुलित प्रयोग (Balanced Fertilizer Use)

उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग फसल को जला सकता है, खासकर मार्च की बढ़ती गर्मी में।

उर्वरक का प्रकारमुख्य कार्यप्रयोग का तरीका
यूरिया (Nitrogen)पौधों की हरियाली और बढ़तइसे हमेशा शाम के समय डालें और हल्की सिंचाई करें।
DAP/SSP (Phosphorus)जड़ों के विकास के लिएइसे बुवाई के समय मिट्टी के नीचे (Basal dose) देना चाहिए।
म्यूरेट ऑफ पोटाश (Potash)फलों की चमक और रोगों से लड़ने की क्षमताफल आने की अवस्था में इसका महत्व बढ़ जाता है।

सूक्ष्म पोषक तत्व (Micro-nutrients)

अक्सर किसान सिर्फ NPK पर ध्यान देते हैं, लेकिन मिट्टी को जिंक, बोरॉन, और सल्फर की भी आवश्यकता होती है।

  • जिंक सल्फेट: धान या मक्का जैसी फसलों के लिए अनिवार्य है।Farming in March in Hindi
  • बोरॉन: यदि आप मार्च में टमाटर या फूलगोभी लगा रहे हैं, तो फलों को फटने से बचाने के लिए बोरॉन का छिड़काव करें।

मार्च में खाद प्रबंधन के विशेष टिप्स

  1. फर्टिगेशन (Fertigation): यदि आप ड्रिप सिंचाई का उपयोग कर रहे हैं, तो खाद को पानी के साथ मिलाकर सीधे जड़ों तक पहुंचाएं। इससे 30-40% खाद की बचत होती है।
  2. तरल जैविक खाद (Jeevamrut): घर पर गुड़, बेसन और गोमूत्र से जीवामृत तैयार करें। यह मिट्टी में मित्र बैक्टीरिया (Microbes) की संख्या को तेजी से बढ़ाता है।
  3. मल्चिंग: खाद डालने के बाद मिट्टी को फसल अवशेषों से ढक दें। इससे तेज धूप में खाद के पोषक तत्व उड़ते (Evaporate) नहीं हैं।

  • गोबर की खाद: जायद फसलों के लिए अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग करें।
  • ड्रिप सिंचाई: यदि संभव हो, तो सब्जियों में ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) अपनाएं। इससे पानी की बचत होगी और उर्वरक सीधे जड़ों तक पहुंचेंगे।Farming in March in Hindi

किसानों के लिए विशेष सुझाव (Tips for March)

  • लू से बचाव: मार्च के अंत में चलने वाली गर्म हवाओं से छोटी फसलों को बचाने के लिए खेत के चारों ओर ‘बाड़’ के रूप में मक्का या बाजरा लगा सकते हैं।
  • मल्चिंग (Mulching): मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए प्लास्टिक मल्च या फसल अवशेषों का प्रयोग करें।
  • बीज उपचार: किसी भी फसल की बुवाई से पहले बीजों को कवकनाशी (Fungicide) से उपचारित जरूर करें।

निष्कर्ष

मार्च का महीना मेहनत का है, लेकिन यह सही योजना बनाने पर साल का सबसे अधिक मुनाफा देने वाला समय भी बन सकता है। रबी की फसलों को सुरक्षित घर लाना और जायद की नई शुरुआत करना ही इस महीने का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। आधुनिक तकनीक और सही बीजों का चुनाव आपको एक सफल किसान बनाता है।Farming in March in Hindi

smallhindiofficeal@gmail.com

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